
- Brand: Pravasi Prem Publishing India
- Language: Hindi
- Weight: 265.00g
- Dimensions: 21.00cm x 14.00cm x 2.00cm
- Page Count: 184
- ISBN: 9788198946225
यह संघर्ष उन दिनों
का है जब बुंदेलखंड का छतरपुर देश के सर्वाधिक पिछड़े जिलों में गिना जाता था । छतरपुर शहर
एक छोटा सा कस्बा था । राजधानी
भोपाल के अखबार भी उस दिन नहीं आते थे . स्थानीय अखबार छोटे आमाप में
अथक परिश्रम से निकलते थे । 23 जुलाई 1980
को शहर के गुप्ता लॉज में कालेज में प्रवेश लेने आई एक युवती के साथ
पुलिस के दरोगा ने बलात्कार किया और इस खबर को स्थानीय दैनिक “कृष्ण क्रांति” ने
25 जुलाई को छाप दिया । उसी रात शहर में
एक आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार हो गया । अगले दिन सारा शहर सडकों पर था । गुस्से भीड़ पर पुलिस ने गोली चला दी. स्थानीय
पत्रकारों ने प्रशासन के खिलाफ कमर कस ली । जिलाधिकारी ने पत्रकारों को प्रताड़ित करने के लिए सारे हथकंडे अपना लिए । मामला
विधानसभा में गुंजा और तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने जिला और स्तर न्यायाधीश के नेतृत्व में न्यायिक आयोग से जांच की घोषणा कर दी । न्यायिक आयोग में सिद्ध हुआ कि गोली चालन अवैध था और इसके लिए तत्कालीन
कलेक्टर को दोषी पाया गया । छतरपुर की
पत्रकारिता का वह संघर्ष सारे देश में
आंचलिक पत्रकारिता के अदम्य साहस का प्रतीक बन गया ।
इस पुस्तक में छतरपुर के उस संघर्ष में तप कर निकले और बाद में देश के शीर्ष
पत्रकार बने राजेश बादल ने भारतीय पत्रकारिता के संघर्ष के एक ऐसे अनछुए प्रसंग को
जीवंत किया है जिसने दूरस्थ अंचलों में बन्दूक
के विरुद्ध अखबार की भूमिका
स्थापित की । पुस्तक में बहुत से
ऐसे गुमनाम नायकों का उल्लेख है जिनके कारण बुंदेलखंड की पत्रकारिता का तीखापन आज भी देश में अनूठा कहा जाता है ।
